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Chaitra Navratri 2023 Day 6 Maa Katyayni

Chaitra Navratri 2023 Day 6 Maa Katyayni: चैत्र नवरात्र के छठे दिन माता के कात्यायनी रूप की पूजा की जाती है... कात्यायनी की पूजा करने से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है... सिद्धि पाने के लिए भी लोग मां कात्यायनी की पूजा करते हैं... Chaitra Navratri 2023 Day 6 Maa Katyayni: चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी को समर्पित है. मां दुर्गा के इस स्वरूप का अवतार कात्यायन ऋषि की पुत्री के रूप में हुआ था, इसलिए इन्हें माता कात्यायनी कहा जाता है. पुराणों में कहा गया है कि मां कात्यायनी की पूजा विवाह संबंधी सभी मामलों के लिए अचूक मानी गई है. अगर कोई कुंवारी लड़की इनकी पूजा करती है तो उसको मनचाहा वर मिलता है. धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा जाता है कि, जो भी भक्त नवरात्रि के छठे दिन मां की पूजा  करता है तो मां के आशीर्वाद से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. चैत्र नवरात्रि 2023 छठवें दिन का मुहूर्त  चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि प्रारंभ 26 मार्च 2023- दोपहर 04.32 चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि समाप्त 27 मार्च 2023, शाम 05.27 गोधूलि मुहूर्त  शाम 06.35 से शाम 06.58...

Shardiya Navratri 2022 8th Day Maa Mahagauri Puja Samagri

नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा अराधना के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत रखा जाता है और मां दुर्गा के साथ महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से जो कोई भी व्यक्ति व्रत रखता है और मां महागौरी की उपासना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां महागौरी को ममता की मूरत कहा जाता है। मां महागौरी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल स्वभाव वाली हैं। चार भुजाओं वाली देवी महागौरी त्रिशूल और डमरू धारण किए हुए हैं। वहीं दो भुजाएं अभय और वरद मुद्रा में रहती हैं। कल यानी 03 सितंबर को अष्टमी तिथि के दिन मां महागौरी की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा की विधि  अष्टमी तिथि की पूजा बाकी के नवरात्रि की अन्य तिथियों की तरह ही की जाती है। जिस तरह सप्तमी तिथि को माता की शास्त्रीय विधि से पूजा की जाती है, उसी तरह अष्टमी तिथि की पूजा भी करनी चाहिए।इस दिन मां के कल्याणकारी मंत्र ओम देवी महागौर्यै नम: मंत्र का जप करें और माता को लाल चुनरी अर्पित करें।जो लोग इस दिन कन्या पूजन कर ...

नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा, जानिए संपूर्ण विधि और मंत्र

 Maa Kushmanda Puja: नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा, जानिए संपूर्ण विधि और मंत्र Shardiya Navratri 2022 4th Day Maa Kushmanda Puja: हिंदू धर्म में नवरात्र का काफी अधिक महत्व है। नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा की जाती है। वहीं चौथे दिन मां कूष्मांडा देवी की पूजा की जाएगी। माना जाता है कि मां कूष्मांडा देवी ने सृष्टि की रचना की थी। कूष्मांडा एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है कुम्हड़ा यानी पेठा की बलि देना। माना जाता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से हर तरह के कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा का विधान है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा का विधान है। 29 अगस्त को नवरात्रि का चौथा दिन है। देवी दुर्गा के सभी स्वरूपों में मां कूष्मांडा का स्वरूप बहुत ही तेजस्वी है। मां कूष्मांडा सूर्य के समान तेज वाली हैं। जगत जननी मां जगदंबे के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है। ...

Shardiya Navratri 2nd Day 2022: ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, खुल जाएंगे किस्मत के दरवाजे

 Shardiya Navratri 2nd Day 2022 : ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, खुल जाएंगे किस्मत के दरवाजे शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जाता है। आइए जानें माता का पूजन किस विधि से करना आपके लिए फलदायी होगा। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों का अपना अलग महत्व है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के अलग स्वरूपों की पूजा बड़ी ही श्रद्धा भाव से की जाती है और माता से घर की सुख समृद्धि की प्रार्थना की जाती यही। इस साल शारदीय नवरात्रि का आरंभ 26 सितंबर को हुआ है और पहले दिन मां शैलपुत्री का पूजन होता है। वहीं दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है और उनका पूजन भी बड़े ही विधि विधान के साथ कुछ नियमों का पालन करते हुए किया जाता है। हम आपको पूरे नौ दिनों में माता के अलग स्वरूपों की पूजा विधि के बारे में बता रहे हैं। आइए उसी क्रम में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया जी से जानें कि दूसरे दिन मां जगदंबा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का पूजन कैसे किया जाता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए कौन से मंत्रों का जाप फलदायी होगा। ब्रह्मचारिणी का अर्थ  मां ब्रह्मचारिणी के नाम मे...

आज से शारदीय नवरात्र शुरू, जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

शारदीय नवरात्र का आरंभ आज से हो चुका है जो 4 अक्टूबर को नवमी तिथि के साथ समाप्त होंगे। इस साल पूरे नौ दिनों के नवरात्र पड़ रहे हैं। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। आइए ज्योतिषी पंडित जगन्नाथ गुरुजी जानते हैं नवरात्र पर कलश स्थापना का महत्व और शुभ मुहूर्त और घट स्थापना की विधि। कलश स्थापना का महत्व  हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान और किसी भी विशेष अवसर पर कलश स्थापना बेहद ही महत्वपूर्ण होती है। शास्त्रों और पुराणों में कलश स्थापना को काफी महत्व दिया जाता है और इससे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि कलश में सभी ग्रह,नक्षत्रों और तीर्थों का निवास होता है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को नवरात्र के पहले दिन देवी आराधना की पूजा और कलश स्थापना की जाएगी। इसका शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट से सुबह 7 बजकर 51 मिनट तक रहे...