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Vaastu Shastra by Bk Shastri Ji In India

வாஸ்து அல்லது வாஸ்து சாஸ்திரம் என்பது அடிப்படையில் சரியான அமைப்புகளின் முறையாகும் பூமியைச் சுற்றியுள்ள வயல்வெளிகள். தனிமங்களின் அறிவியல் பயன்பாடு, முழுமையான சமநிலையான சூழலை உருவாக்க முடியும், இது நல்ல ஆரோக்கியம், செல்வம் மற்றும் செழிப்பு ஆகியவற்றை உறுதி செய்கிறது. மக்கள் இன்று வாஸ்து சாஸ்திரக் கருத்தைப் பற்றி அதிக விழிப்புணர்வு மற்றும் குறிப்பாக உள்ளனர். செழிப்பு மற்றும் மகிழ்ச்சியின் நன்மைகளுடன் பாரம்பரியம் மிகவும் புதிரானதாகி வருகிறது. வாஸ்து வாழ்வில் நேர்மறை பிரபஞ்ச ஆற்றலை ஈர்ப்பதில் கவனம் செலுத்துகிறது மற்றும் வாழ்க்கையில் பெரிய அளவில் வெற்றி பெறுகிறது. நீங்கள் வசிக்கும் இடம் அல்லது நீங்கள் வசிக்கத் திட்டமிடும் இடம் வாஸ்து சாஸ்திரத்தின் மூலம் சூரிய ஆற்றல், சந்திர ஆற்றல், அண்ட சக்திகளின் பலன்களைப் பயன்படுத்திக்கொள்ளலாம். வாஸ்து சாஸ்திரத்தின் அனைத்து விதிகளையும் செயல்படுத்த முடியாது என்றாலும், முடிந்தவரை அதை பராமரிப்பது நன்மை பயக்கும். வாஸ்து கொள்கைகள் முக்கியமாக தனிப்பட்ட குடியிருப்பு வீடுகள், தொழில்கள், கல்வி நிறுவனங்கள், வணிக வளாகங்கள், தியேட்டர்கள், மருத்துவமனைகள், தேவாலயங்கள் போ...

महानवमी के दिन करें माता सिद्धिदात्री की विशेष पूजा, जानें पूजा विधि व मंत्र

अधिक जानकारी के लिए फोन करें ज्योतिष बी के शास्त्री जी - +91-9888720397 शारदीय नवरात्रि का आज नवां दिन है। आज मां दुर्गा के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। मान्यता है कि माता सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति को सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही उसे ज्ञान, बुद्धि, धन, ऐश्वर्य इत्यादि सभी सुख-सुविधाओं की भी प्राप्ति होती है। कई लोग नवरात्र पर्व की नवमी तिथि को कन्या पूजन करके 9 दिनों से चले आ रहे व्रत का पारण करते हैं। इस दिन हवन व आरती से इस विशेष पर्व का समापन करते हैं। आइए जानते हैं माता सिद्धिदात्री का स्वरूप पूजा विधि, मंत्र और आरती। महानवमी तिथि और शुभ मुहूर्त द्रिक पंचांग के अनुसार, महानवमी का शुभ मुहूर्त 3 ​​अक्टूबर को शाम 04:37 बजे शुरू होगा और 4 अक्टूबर को दोपहर 02:20  बजे समाप्त होगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:38 बजे से शुरू होकर 05:27 बजे समाप्त होगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 तक जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 02:08 से दोपहर 02:55 तक रहेगा. इस दिन का महत्व देवी सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की स्रोत हैं और सभी आठ अष्टसिद्धियों को धारण करत...

Shardiya Navratri 2022 8th Day Maa Mahagauri Puja Samagri

नवरात्रि की अष्टमी तिथि मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा अराधना के लिए समर्पित है। इस दिन व्रत रखा जाता है और मां दुर्गा के साथ महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से जो कोई भी व्यक्ति व्रत रखता है और मां महागौरी की उपासना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मां महागौरी को ममता की मूरत कहा जाता है। मां महागौरी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल स्वभाव वाली हैं। चार भुजाओं वाली देवी महागौरी त्रिशूल और डमरू धारण किए हुए हैं। वहीं दो भुजाएं अभय और वरद मुद्रा में रहती हैं। कल यानी 03 सितंबर को अष्टमी तिथि के दिन मां महागौरी की पूजा की जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं मां को प्रसन्न करने के लिए पूजा की विधि  अष्टमी तिथि की पूजा बाकी के नवरात्रि की अन्य तिथियों की तरह ही की जाती है। जिस तरह सप्तमी तिथि को माता की शास्त्रीय विधि से पूजा की जाती है, उसी तरह अष्टमी तिथि की पूजा भी करनी चाहिए।इस दिन मां के कल्याणकारी मंत्र ओम देवी महागौर्यै नम: मंत्र का जप करें और माता को लाल चुनरी अर्पित करें।जो लोग इस दिन कन्या पूजन कर ...

Shardiya Navratri 2022 Day 6 माता कात्यायनी की पूजा

 माता कात्यायनी की पूजा से हो जाते हैं सभी दुःख दूर, जानें पूजा विधि और मंत्र! शास्त्रों के अनुसार शारदीय नवरात्र के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस वर्ष षष्ठी तिथि 1 अक्टूबर 2022 के दिन है। माता कात्यायनी को भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्री के रूप में भी जाना जाता है। माता कात्यायनी (Navratri 2022 Day 6 Puja) का रूप सबसे सुंदर है और  बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में इन्हें छठ मैया के रूप में भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के छठे दिन माता कात्यायनी की विधि-विधान से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। जानिए माता कात्यायनी का स्वरूप, पूजा विधि, पूजा मंत्र और आरती- मां कात्यायनी का स्वरूप शास्त्रों के अनुसार माता का स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला है और उनकी चार भुजाएं हैं। प्रत्येक भुजा में माता ने तलवार, कमल, अभय मुद्रा और वर मुद्रा धारण किया है। माता कात्यायनी को लाल रंग सर्वाधिक पसंद है। किंवदंतियों के अनुसार महर्षि कात्यायन की तपस्या के बाद माता कात्यायनी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया था। मां दुर्गा इन्हीं के रूप में महिषासुर का वध कर उसके आतंक स...

Shardiya Navratri 2022 Day 5 ( स्कंदमाता की पूजा )

 नवरात्र के पांचवें दिन करें स्कंदमाता की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, मंत्र और भोग Shardiya Navratri 2022 Day 5 नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। माना जाता है कि स्कंदमाता संतान देने के साथ सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। जानिए मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप की कैसे करें पूजा।  Shardiya Navratri 2022 Day 5: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विधान है। इस साल 30 सितंबर को मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। स्कंदमाता को मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि स्कंदमाता भक्तों की समस्त कामनाओं की पूर्ति करती हैं। मां दुर्गा के पंचम स्वरूप देवी स्कंदमाता की उपासना से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशियां आती हैं। संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की आराधना करना लाभकारी माना गया है। स्कंदमाता की पूजा से भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनकी पूजा से भक्त अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं मां के स्वरूप, पूजा विधि...